ज्यादा ज्ञानी बूध्हिमान व अति सोच विचार करने वाला हमेशा परेशान एवं दुखी
रहने के साथ ह्रदयहीन होने कि ओर अग्रसर रहता है !
अगस्त्य
प्रेम धर्म अति चूलबूलो पकड़ पावें गंभीर,
यहाँ हारन को तैयार जो वो कहलावे वीर,
लूचन्न कि बस्ती में भूखो मरे कबीर,
दुनिया भई सयानी गदहे बने वज़ीर,
चार धाम घर आयो मोरे मीरा नाची संग नीर,
मैं घबडाऊं रात दिन टूट रही जंजीर,
अगस्त्य
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